भारत में वैक्सीन के लिए कम तापमान बना बड़ी चुनौती

नई दिल्ली

जब दुनियाभर में कोविड-19 (Covid 19) महामारी से निपटने के लिए कई संभावित टीके परीक्षण के आखिरी चरण में पहुंच रहे हैं, ऐसे में वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत के लिए वे टीके शायद कारगर नहीं होंगे, जिनके भंडारण के लिए बेहद कम तापमान की जरूरत है और प्रोटीन बेस्ड वैक्सीन देश के लिए ठीक हो सकती हैं। वैज्ञानिकों ने अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स द्वारा विकसित किए जा रहे संभावित टीके को भारत के लिए सबसे उपयुक्त बताते हुए कहा कि कोविड-19 का सही टीका खरीदने का फैसला कई बातों पर निर्भर करेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि टीका कितना सुरक्षित है, उसकी कीमत क्या है और उसे इस्तेमाल करना कितना सुविधाजनक है। इससे वे तीन संभावित टीके शायद नकारे जा सकते हैं, जो पिछले कुछ दिन में 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावी साबित हुए हैं। फाइजर-बायोएनटेक तीसरे चरण के अंतरिम परिणाम में 90 प्रतिशत, स्पूतनिक पांच 92 प्रतिशत और मॉडर्ना 94.5 प्रतिशत प्रभावी साबित हुआ है। इन संभावित टीकों के परीक्षणों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही कोरोना वायरस (Corona Virus) का टीका मिल सकता है। इन तीनों में से कोई भी प्रोटीन आधारित नहीं है, लेकिन भारतीय परिस्थितियों के लिए अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना सबसे उपयुक्त हो सकती है, क्योंकि इसके लिए अन्य संभावित टीकों के मुकाबले उतने कम तापमान की आवश्यकता नहीं है। रोग प्रतिरक्षा वैज्ञानिक सत्यजीत रथ ने कहा कि अमेरिका समर्थित फाइजर-बायोएनटेक और रूस के स्पूतनिक पांच को नोवावैक्स द्वारा विकसित किए जा रहे प्रोटीन आधारित संभावित टीके की तुलना में बेहद कम तापमान में रखने की आवश्यकता है।

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