गांव तल्लण के लोगों में रिसीवर खिलाफ पनप रहा गुस्सा, खुस सकती है ‘साहिब की कुर्सी’

जालन्धर (लखबीर)

सरकारी दफ्तरों का रब्ब ही राखा है क्योंकि वहां कुछ अधिकारियों को ‘शक्तिमान’ जैसा दर्जा दिया जाता है तथा कुछेक अधिकारी या मुलाजिम सिर्फ हाजरी लगाने तक सीमत रहते हैं। इसी तरह जालन्धर के एक अधिकारी को उसकी ‘शक्ति’ से अधिक काम सौंप रखा है जिस कारण काम संभलने की बजाए उलझन में पड़ रहे हैं। इसी तरह का मामला सब रजिस्ट्रार-1 का सामने आ रहा है, जिन्हें रजिस्ट्रियों के साथ-साथ गुरद्वारा शहीद बाबा निहाल सिंह जी तल्लहण के रिसीवर की भी जिम्मेवारी सौंपी गई है, जो उनसे संभलती दिखाई नहीं दे रही है। अगर गांव के लोगों व पंचायत की मानें तो साहिब को जल्दी ही रिसीवर पद से हटाने के लिए उच्चधाकारियों से गुहार लगाई जाएगी। अब बात करतें हैं मुद्दे कि आखिर गांव व पंचायत का क्या है रोष…

एक साल बाद दिए ‘दर्शन’…

लोगों अनुसार रिसीवर साहिब ने जब से पद संभाला है, तब से वह दो-चार बार ही गुरद्वारा साहिब में पहुंचे होंगे तथा हैरानी की बात है कि चार्ज लेने के बाद वह एक साल बाद आए थे, जिस कारण गुरद्वारा साहिब का माहौल खराब होने लगा।

मर गया लांगरी पर अधिकारी ने नहीं की परवाह…

गांव के लोगों अनुसार हैरानी की बात है कि गुरद्वारा साहिब का एक लांगरी कुएं में डूब कर मर गया, जिसकी लाश मिलने के बाद कत्ल होने के आशंका जाहिर की गई। मामला अभी भी खटाई में है, वहीं रिसीवर साहिब ने इस मामले में भी कोई हस्तक्षेप करना मुनासिब नहीं समझा, जिस कारण भी लोगों में रोष है।

मिल रही गुटबाजी को हवा…

पंचायत में गुस्सा है कि रिसीवर साहिब के कारण गुटबाजी बन सकती है क्योंकि वह बहुत सारे लोगों को इगनोर करते आ रहे हैं। जबकि पुराने रिसीवर हमेशा संगत व सेवादारों को आगे रखकर गुटबाजी से दूर रहने का सबूत देते आ रहे थे।

बन सकता है पुराना माहौल…

गांव को भय है कि रिसीवर के इस रवैया से कहीं पुराना समय वापिस न आ जाए क्योंकि रिसीवर की इस कार्रवाई से धड़्ड़ेबाजी बन रही है। लोगों ने बताया कि पूराने समय दौरान कत्लेआम तक का माहौल भी गुटबाजी के कारण ही बना था, जो फिर से पनपने के आसार बन चुके हैं। लोगों की मानें तो प्रशासन ने रिसीवर गांव में माहौल शांत रखने के लिए लगाया था पर अब गुटबाजी होने से माहौल में तनाव बन सकता है।

काल डिटेल से हो सकता दूध का दूध पानी का पानी…

वहीं गांव के लोगों ने कहा कि पुराने समय दौरान जो भी रिसीवर लगे रहे हैं, वह पूरा समय गुरद्वारा साहिब को देते आ रहे थे पर यह रिसीवर छुट्टी वाले दिन भी आपने घर को निकल लेते हैं तथा गुरद्वारा साहिब आने को आपनी ड्यूटी नहीं समझते। अगर इनकी काल डिटेल निकलवाई जाए तो साफ होगा कि वह स्टेशन लीव करके आपने घर जाते रहे हैं जबकि कोई अधिकारी बिना परमिशन स्टेशन लीव नहीं कर सकता। पूरे मामले संबंधी जब रिसीवर से पूछा गया तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

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