भ्रष्टाचार रोकने के लिए किया गया है वेरिफिकेशन का इंतजाम

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम में नित नए घोटाले सामने आ रहे हैं। तमिलनाडु, यूपी के बाद अब राजस्थान में भी अपात्र लोगों को पैसा मिलने का खुलासा हुआ है। यहां बड़ा सवाल ये है कि पांच फीसदी लाभार्थियों का फिजिकल वेरिफिकेशन जरूरी किया है उसके बाद भी कैसे इस योजना में फर्जीवाड़ा हो रहा है। इस योजना का पैसा सही हाथों में जाए इसके लिए मोदी सरकार ने इसमें बड़े बदलाव किए थे। लाभार्थियों की पात्रता का पता लगाने के लिए 5 फीसदी किसानों का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरीफिकेशन) करना था। जिला कलेक्टर के नेतृत्व में वेरीफिकेशन की प्रक्रिया होनी थी। इसके बावजूद कैसे फर्जी किसानों को पैसे मिल रहे हैं। मंत्रालय चाहता है कि राज्यों में इस स्कीम के नोडल अधिकारी नियमित रूप से वेरीफिकेशन की प्रक्रिया की निगरानी करें। लेकिन, जमीन पर क्या हो रहा है इसका पता स्कीम में हो रहे घोटालों से चल रहा है। हालांकि, अब बताया ये जा रहा है कि वेरिफिकेशन पर सख्ती होगी। इसलिए गलत जानकारी लेकर अगर आप पैसा ले रहे हैं तो सावधान हो जाईए। या तो आप 5 फीसदी फिजिकल वेरिफिकेशन में फंसेंगे या फिर देर सबेर आपके अकाउंट से पैसा वापस ले लिया जाएगा। अगर आवश्यक महसूस किया जाता है तो बाहरी एजेंसी भी इस काम में शामिल हो सकती है। केवल उन्हीं लोगों का सत्यापन किया जाएगा जो लाभ प्राप्त कर चुके हैं।

सरकार ने इतने लोगों से वापस लिया है पैसा

2019 में दिसंबर तक सरकार आठ राज्यों के 1,19,743 लाभार्थियों के खातों से इस स्कीम का पैसा वापस ले चुकी है। क्योंकि लाभ लेने वालों के नाम एवं उनके दिए गए कागजात मेल नहीं खा रहे थे। इसलिए स्कीम के तहत पैसा लेन-देन (ट्रांजेक्‍शन) की प्रक्रिया को संशोधित करके अब और कठिन किया गया है। वेरीफिकेशन की प्रक्रिया अपनाई गई है ताकि इस प्रकार की घटना फिर न हो।

वैरिफिकेशन कैसे होगा

लाभार्थियों के डेटा के आधार वेरिफिकेशन को भी अनिवार्य कर दिया गया है। अगर संबंधित एजेंसी को प्राप्त डिटेल्स में आधार से समानता नहीं मिलती है तो संबंधित राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों को उन लाभार्थियों की जानकारी में सुधार या बदलाव करना होगा।

जानिए, किसे नहीं मिलेगा लाभ

भूतपूर्व या वर्तमान में संवैधानिक पद धारक, वर्तमान, पूर्व मंत्री, मेयर, जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक, एमएलसी, लोकसभा और राज्यसभा सांसद को पैसा नहीं मिलेगा, भले ही वो खेती करते हों। केंद्र या राज्य सरकार में अधिकारी एवं 10 हजार से अधिक पेंशन पाने वाले किसानों को लाभ नहीं। पेशेवर, डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, वकील, आर्किटेक्ट, जो कहीं खेती भी करता हो उसे लाभ नहीं मिलेगा। पिछले वित्तीय वर्ष में इनकम टैक्स का भुगतान करने वाले किसान इस लाभ से वंचित होंगे।

गड़बड़ी पर ऐसे वापस लिया जाता है पैसा

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने राज्यों को एक पत्र लिखकर कह चुका है कि अगर अपात्र लोगों को लाभ मिलने की सूचना मिलती है। तो उनका पैसा कैसे वापस होगा। उसे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) से वापस लिया जाएगा। बैंक इस पैसे को अलग अकाउंट में डालेंगे और राज्य सरकार को वापस करेंगे। राज्य सरकारें अपात्रों से पैसे वापस लेकर https://bharatkosh.gov.in/ में जमा कराएंगी। अगली किश्त जारी होने से पहले ऐसे लोगों का नाम हटाया जाएगा।
Verification has been done to stop corruption

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